TIGER PATAUDI JAISE SITARE KO KHONA DESH KE LIYE CHHATI HAI
Friday, September 23, 2011
Saturday, September 3, 2011
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं ओह मुकाम ओह फिर नहीं आते..........................................,
मैं इस कद्र परेसान होता हूँ जैसे की.............................................................................,
खुदा भी बचाए मेरे दोस्तों से ...................................................................................,
इस कद्र इम्तहान होता है पता बाद में दोस्तों से चलता हैं । .................................................,
दोस्त अछे मिलते नहीं दोस्ती अछि होती हैं ....................................................................,
...................................................................................................................,
आपका अपना ..................................,
रमण
मैं इस कद्र परेसान होता हूँ जैसे की.............................................................................,
खुदा भी बचाए मेरे दोस्तों से ...................................................................................,
इस कद्र इम्तहान होता है पता बाद में दोस्तों से चलता हैं । .................................................,
दोस्त अछे मिलते नहीं दोस्ती अछि होती हैं ....................................................................,
...................................................................................................................,
आपका अपना ..................................,
रमण
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